Indian ancient history /indian ancient history in hindi


मानव की उत्पति/ऐतिहासिक विकास  

सबसे पहले  पृथ्वी  की उत्पति हुई उसके बाद मानव की उत्पति हुई और इस मानव की उत्पति ने ही इतिहास को जन्म दिआ | मानव की उत्पति के साथ ही दो चीजों का विकास होता है पहला मानव का विकास  यही विकास मानव में सभय्ता और संस्कृति का जन्म देता है | यानि मानव का विकास से मानव सीधे सीधे मानव की सभ्यता और संस्कृति से ज़ुरा होता है | यह सभ्यता और संस्कृति का निर्माण भगौलिक आधार पर भी तय किया जाता है यानि सभ्यता और संस्कृति का निर्माण करने में बनाने में उसका जो भौगोलिक क्षेत्र  होता है जो भौगोलिक जलवायु होता है जो भौगोलिक प्रभाव होता है सबसे ज्यादा परता है किसी भी सभ्यता और संस्कृति के निर्माण में |

सभ्यता और संस्कृति का विकास

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सिंधु  सभ्यता
वैसे तो विश्व  में बहुत सारे  सभ्यता का विकास हुआ है लेकिन विश्व  में दो सबसे महत्वपूर्ण  सभ्यता का विकास हुआ है पहला सिंधु  सभ्यता और दूसरा मेसोपोटामिया  सभ्यता(मिस्र की सभ्यता)| सिंधु सभ्यता  का अस्तित्व भारत में मिलता है लेकिन कुछ समय के बाद सिंधु  सभ्यता पूरी तरीके से नस्ट हो जाता है उसके बाद भारत में एक नए सभ्यता का उदय होता है उसे हम वैदिक सभ्यता कहते है इस वैदिक सभय्ता के निर्माता आर्य थे इसे आर्य संस्कृति भी कह सकते है इस आर्य संस्कृति  का सबसे ज्यादा  प्रभाव  भारत के दो क्षेत्रो  में दिखाई  परता है पहला उत्तर का प्रवतिय प्रदेश और दूसरा मध्यवर्ती मैदान| इसके अलावा भारत  में दक्षिण का पठारीय  प्रदेश और तटीय क्षेत्रो  में द्रविड़ संस्कृति का विकास होता है|  सिंधु  सभ्यता एक समय तक अस्तित्व में रहती है और एकाएक यह  सभ्यता  पूरी रूप से समाप्त हो जाती है सिंधु सभ्यता के समाप्त के बाद वैदिक सभ्यता का निरमान होता है |
bhartiya sabhyata aur sanskriti/bhartiya sabhyata in hindi
सभ्यता और संस्कृति 


 वैदिक सभ्यता

वैदिक सभ्यता को दो भागो में बाटा जाता है पहला ऋग्वैदिक सभ्यता और दूसरा  उतर वैदिक सभ्यता जिसे कभी कभी पूर्व वैदिक सभ्यता भी बोल देते है |
इन दोनों सभ्यताओं के बाद भारत में नए सभ्यता का सुरुआत  होता है ऋग्वैदिक सभ्यता में वर्ण व्यवस्ता  की सुरुआत  होती है और यही वर्ण व्यवस्था  उत्तर वैदिक काल में जा कर जाती व्यवस्था  का रूप ले लेती है | उत्तर वैदिक सभ्यता  के विकास के बाद सूत्रकाल आ जाता है और सूत्र काल के बाद एक और महाकाव्य काल आ जाता है | इस महाकाव्य काल के दो महाकाव्यों की रचना की गई थी जिसे रामायण और महाभारत कहते है | विस्वास और अतार्किक और अन्यापूर्ण कर्मकाण्डो के विरोद में कुछ नए धर्म जैन धर्म और बौद्ध धर्म  की उत्पति होती है इस धर्म की उत्पति क्षत्रिय द्वारा की गई थी |

वैदिक सभ्यता / vadik sabhyata in hindi
वैदिक सभ्यता


मगध साम्राज्य

 मगध साम्राज्य में पहला वंश हर्यक वंश स्थापित होता है और अंतिम वंश नन्द वंश अस्थापित होता इसी नन्द वंश का शासक था घनानंद |  घनानंद ने चाणक्य का मज़ाक उडाया  था  और इसी  चाणक्य ने धनानंद  के मजाक उड़ाने के कारन ही चाणक्य ने धनानद के साम्राज्य को चन्द्रगुप्त मौर्य के माध्यम से समाप्त कर दिया और मौर्य साम्राज्य की स्थापना की | वास्तव  में भारत में राजनितिक इतिहास की सुरुआत  मगध  साम्राज्य से मानी  जाती है |
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मगध साम्राज्य 


भारत में पहला विदेशी आक्रमण

नन्द वंस के पतन के बाद  भारत में ईरानियो /परसियो  के द्वारा पहला  आक्रमण होता है |  इसी  समय युनानिओ का आक्रमण भी  होता है युनानिओ  के आक्रमण में  सबसे महत्वपूर्ण  आक्रमण सिकंदर का होता है | 

मौर्य साम्राज्य

मौर्य साम्राज्य में सबसे महत्वपूर्ण   शासक अशोक था जिसने बौद्ध धर्म को संरक्षण  दिया और बौद्ध धर्म को बड़े स्तरो  पर प्रचार करवाया यहाँ तक की श्रीलंका तक जा कर उसने बौद्ध धर्म  की  प्रचार करवाया अपने शासन व्यवस्ता  में धम व्यवस्ता  को लागु किया | अशोक के बाद उसके उत्तराधिकारी उतने योग्य नही रहे और इस साम्राज्य में कई छोटे छोटे राज्यों की स्थापना  हुई |
मेयोत्तर काल में ब्र्हामण  राज्य की स्थापना किया गया इसमें सबसे पहला सुंग  वंस और उसके बाद आन्ध्रसातवाहन वंस था |  इस वंस के लोग वास्तव में भारत के बड़े क्षेत्रो  पर अधिकार नहीं किया बल्कि यह छोटे छोटे क्षेत्रो  पर ही अपना अधिकार या प्रभाव बने रहे |  इसका प्रभाव यह परा की  इस समय कमजोर जानकर  भारत की केंद्रीय शक्ति  पर विदेशी आक्रमण फिर हुए | मौर्योत्तर  काल में भारत में दो प्रकार के राज्य स्थापित होते  है पहला ब्राहम्ण   राज्य और दूसरा विदेशी आक्रमण | ब्राहम्ण राज्य में पहला सुंग वंस  उसके बाद आन्ध्रसातवाहन और दूसरा विदेशी आक्रमण में पहला  आक्रमण ग्रीक वैक्रियण (हिन्द यवन) इसके बाद शक पहलव /पार्थियन कुषाणो हुनो का आक्रमण  होता है |
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मौर्य साम्राज्य 


गुप्त साम्राज्य

मोर्योत्तर काल में कमजोर केंद्रीय प्रशासन  का फायदा उठाते हुए एक नए साम्राज्य की स्थापना होती है जिसे हम गुप्त साम्राज्य कहते है जिसमे समुन्द्र गुप्त चन्द्रगुप्त द्वितीय या विक्रमादित्य  अदि महत्वपूर्ण शासक  थे |  गुप्त काल के बाद नए  काल की शुरुआत  होती जिसे गुप्तोत्तर   काल कहते  है |  इस गुप्तोत्तर काल में एक महत्वपूर्ण शासक रहा  जिसे हम पुष्यभूति वंस कहते है |  गुप्तोत्तर काल मे क्षेत्रिए  सत्ता पर कुछ विद्रोह हुए जिसे त्रिकोणीय  संघर्ष कहते है जिसमे तीन शक्तिया  पहला गुर्जर प्रतिहार वंस दूसरा पाल वंश और तीसरा राष्ट्रकूट वंस  ने भाग लिया |  ये तीनो कन्नौज  पर कब्ज़ा को लेकर लर रहे  रहते थे ये तीनो  शक्तियॉ आपस में युद्ध करने के बाद कमजोर हुई और इसका फायदा तुर्कियो ने उठाया |  इन तीनो शक्तियाँ  आपस में लरने के बाद इतनी कमजोर हो गई कि अब इनमे  इतना दम नहीं रहा की वे तुर्कियो के आक्रमण को रोक सके |

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